Wednesday, December 11, 2019

भारत के सरकार का विरोध क्यों फैशन बन गया है

भारत के सरकार का विरोध क्यों फैशन बन गया है , क्यों हर जगह भारत सरकार की नियमो और बिल का विरोध किया जा रहा है . क्या गलत है तीन तालक को अपराध का दर्जा देने वाले मूदें में , क्या गलत है धरा ३७० और ३५ ए कश्मीर में डिसॉल्व कर के कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा देने में , क्या गलत है अयोध्या के फैसले को टाइम बांड में करवा के , क्या गलत है नागरिकता संसोधन बिल और नागरिकता रजिस्ट्री बनवा के .
क्या सरकार हर मुद्दे के लिए पुरानी सरकार की तरह ढीले ढाले रवैया अपनाये . आज भारत बदल रहा है हर उस मुड़ी जो देश हिट में है उम्मीद है सारे देश के लोग बिना पार्टी और जाती भेदभाव के सरकार का समर्थन दें , कुछ मुद्दे देश हित में ही जुड़े होते है देश के विकाश के लिए उनको स्पस्ट करना जरुरी होता है . कम से कम हर उलझे हुए मुद्दे का निरकारन तो हो रहा है . अगर मुस्लिम पक्ष को लगता है की उनके साथ कुछ गलत हुआ है तो वो अपनी राय जाहिर करें . अगर बाबरी मस्जिद गिरना वो आस्था से जोरते है तो उनको याद रखना चाहिए हिन्दुओ के हर उस आस्था पर चोट पहुंचे गयी है जिससे आस्था की सर्वोपरि शिखर ज़ुरा था . सऊदी अरब ने ना जाने कितने मस्जिदों और कब्रों को गुमनाम किया थोड़ा पढ़ कर देख लें . भारत में ही मस्जदों को आस्था का परशान बना लिया जाता है .
मेरे देश अब तो जागो अब तो अपने इतिहास को समझो जानो देश आपका है देश है तो हम है हम है तो देश है .

Saturday, November 30, 2019

आखिर भारत में विरोध क्यों ?

ट्रिपल तलाक पर बनाये गए कानून का विरोध मैंने पढ़े लिखे मुसलमान को करते देखा है . मैंने देखा है माननीय मीडिया के कुछ सेक्युलर वक्ताओं को विरोध करते हुए और तो और पढ़े लिखे हैदराबाद के नेताओं ने भी विरोध किया . 
हे भारत के पढ़े लिखे जाहिलो आप लोग कब इन्शान बनेंगे आप लोग कब सच को सच बोलना सही का साथ देंगे  कब समझेंगे की इस्लाम के अंदर भी कुरुति पैदा हो सकती हैं . समय के साथ अच्छी चीजों का समावेश किया जा सकता है . अगर कोई हिन्दू नेता धर्म से ऊपर उठकर किसी सामजिक कुरीति को नियम कानून के दायरों में लाता है और सामजिक समावेश का उदहारण पेश करता है तो भी भारत के मुसलमान उसके विरोध में खरे हो जातें है मैंने तो मीडिया के एक ऐसे धरे को भी इस फैसले के खिलाफ खरे होते देखा है जिन्होंने सेक्युलर का ढोंग ओढ़ रखा है जिनका नाम आरफा खानम शेरवानी है . आरफा खानम शेरवानी ने तो एक नयी डॉक्टराइन ही इजाद कर दी है जिसमे वो कह रही थी की ट्रिपल तलाक़ के बहाने भारत के हिन्दू , मुस्लिम आदमी की मोरालिटी को यानी आत्मसमंमान पर चोट पंहुचा कर उनको निचा दिखाना चाहता है .
आखिर कब सुधरेंगे हम , जनसँख्या नियंत्रण भी मुसलमान के खिलाफ लोगो को प्रतीत होता है जबकि यह तो देश के लिए एक मुद्दा है . यही हाल मैंने NRC नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजन के लिए भी विरोध के स्वर सुनाई देता है . आखिर सरकार नाम की कोई चीज है की नहीं . क्या अवैध घुसपैठ एक देश हित का मुद्दा नहीं है . क्या भारत सरकार अपने सारे नागरिक का नाम अपने आधिकारिक रजिस्टर में अपडेट नहीं कर सकता है .
मैंने तो कश्मीर में भारत के संविधान में किये गए परिवर्तन का विरोध करते देखा . अगर हिंसा को उतारू भीड़ और भड़काने वाले देश से अपने लोगो को बचने के लिए थोड़ी शख्ती बरती गयी तो उसका भी एक ख़ास वर्ग का विरोध सुना गया . मानवाधिकार और मानवता की बात सुनने को मिली जो सब से जायदा इसका हनन करता आ रहा है .
भारत के हिन्दू और मुसलमानो से अनुरोध है की वास्तविकता से मुँह ना मोरे ... चीजों को यथार्थ में समझे . हिंदुस्तान की धरती सभी धर्मो की जनंनी है और रक्षक है . 

न संभलोगे तो मिट जाओगे हिंदुस्तान वालो, तुम्हरी दास्तान भी न होगी, दास्तानों में!

तन की फिक्र कर नादां मुसीबत आने वाली है, तेरी बर्बादियों के मशवरे है आसमानों में! न संभलोगे तो मिट जाओगे हिंदुस्तान वालो, तुम्हरी दास्तान भी न होगी, दास्तानों में!

हमारे प्यारे देश के सदर्भ में ये मुहावरे एकदम सटीक बैठते है . अभी भारत में जैसी स्थति बनती जा रही है लोगों के बीच जो दूरियां बनती जा रही है अगर अभी नहीं पुरे भारत को एक बार फिर झकझोरा गया तो वो दिन दूर नहीं है जब हम विश्व के लिए एक गलत मिसाल ना बन जाएँ जिसका डर हमे हमेशा से सताता रहा है  . भारत के हर धर्म , मजहब और विचारधारा रूपी मोती को देशभक्ति रूपी डोरी में पीरोंना होगा .
                                                     भारत में बाहरी ताकतों द्वारा जिस तरह से अथक कोशिस की जा रही है धर्मो के आधार पर संस्कृति के आधार पर तोरने की अगर इसका डट कर मुकाबला नहीं किया जाएगा तो स्थिति और विकत रूप ले सकती है . कश्मीर की जनता जिस तरह भारतविरोधी नारा लगाती है , पंजाब में जिस तरह अलगवादी संगठन बाहरी ताकत के इशारे पर अलग देश की मांग करने लगे थे गहरी चिंता की विषय है . हमारी अपनी जनता जो की इसी मिटटी में जनम ली है विदेशी ताकतों के बहकावे में आकर अपने देश की रक्षा करने वाली विश्व की बेहतरीन अनुशाशन को निभाने वाली आर्मी की दुश्मन बन गयी .जड़ा यह सोचे की कैसा लगता होगा जब हमारा रखवाला अपने घर में अपने ही आदमिओं के द्वारा मारा जाता है .
                                        हर उस चीज का आजकल विरोध होता है जो समानता के अधिकार को बढ़ावा देता है , देश को एक धागे में पिरोता है , सारे धर्मो को एक ही अधिकार देता है और महिलाओ की हक़ की बात करता है . हम लोग क्यों नहीं अपने अंतरात्मा को एक बार झाकतें है अपने आप में सोचते है देश है तो हम है अगर देश नहीं तो हम कैसे रहेंगे .
    हम ने अपने देश को धर्म के नाम पर एक बार पहले भी तोड़ डाला , लानत है ऐसी मजहबी उन्माद को जो देश को तोड़ने की जिद पर अरा था और फिर उबाले मार रहा है . भारत में रह कर किस से आजादी चाहिए  . भारत में जो आजादी है वो बाकी विश्व में एक सपना ही है . भारत लोकतंत्र का संस्थापक देश है भला यहाँ किस तरह का भेदभाव है . मेरा अनुरोध है देश के रहने वाले लोगों से देश को जोड़े कोई गलती हुई है तो सुधर करें . महान भारत को पुनः विश्व पटल पर सूरज की तरह स्थापित करें जो अभी तारों की तरह टीम टीमा रहा है .

Wednesday, November 27, 2019

भारत की नीती क्या मुस्लिम विरोधी है ?

देश की एकता कई लिए जरुरी है सरकार पर विश्वास और इसके बराबर ही जरुरी है आजकल धर्मो की एकता . जिस तरह आज से हजार साल पहले भारत पर कोई भी आता था और भारत के संस्कृति को सिर्फ इसलिए बर्बाद कर के चला जाता था क्योंकि भारत टुकड़ो में बता हुआ था और सभी राजा जो छोटे छोटे टुकड़ो का प्रतिनिधत्व करते थे वो आपस में लरते रहतें थे . ठीक वही हालत आज हमारे देश की है हिन्दू मुस्लिम और अन्य जातिओं के बीच एक दरार पर गयी है हर धर्म के लोग सरकार पर विश्वास नहीं जमा पा रही है . एक समुदाय विशेष को लगता है की केंद्र की सरकार सिर्फ हिन्दू हिन्दू कर रही है मुस्लमान वर्ग पूरी तरह उपेक्षित हो रहा है .
एक नजर में देख कर लगता है की तीन तलाक , बाबरी मस्जिद , और कश्मीर इशू तीनो उठाये गए कदम मुस्लिम दमन का प्रतिक है और आने वाले ान . आर .सी , जनसँख्या निरोधक कानून , और यूनिफार्म सिविल कोड भी मुस्लिम विरोधी कानून है . में अपने जानकारी से स्पस्ट करना चाहता हूँ की सिर्फ तीन तालक ही मुस्लिम समुदाय से सम्बंधित कानून था जो की सिर्फ मुस्लिम समुदाय पर केंद्रित था बाकी सारे मुद्दे तो देशहित में था और है . आप न आर सी का विरोध नहीं कर सकतें है यह सरकार को अधिकार देती है अपने नागरिको की जानकारी कण्ट्रोल करने की और अपने सीमा की रक्षा करने की आये हुए घुसपैठियों पर नजर रखने की .
जनसँख्या कण्ट्रोल पर बनाये गए कानून सभी धर्मो के लिए जरुरी है २० साल में ३२ करोड़ जनसंख्या वृद्धि एक टिक टिक करता हुआ टाइम बम है जो फटेगा जरुरु . सरकार का ही काम ही सभी मुलभुत सुविधा उपलब्ध करना अपने नागरिको का घायल रखना इसलिए यह एक देस हित से ज़ुरा मुद्दा है इसका विरोध नहीं होना चाहिए .
यूनिफार्म सिविल कोड सारे धर्मो पर अपनाया जाने वाला एक कानून है ताकि एक देश एक कानून हो . आज कल का समाज रूढ़िवादी नहीं रह गया है जो खानाबदोश की तरह अलग अलग नियम कानून पर चले .इसलिए यूनिफार्म सिविल कोड की जरुरत मजबूत भारत के लिए जरुरत है .
मेरा भारत के हर धर्म के लोगो से अपील है की सरकार पर विश्वास कायम रखें और हर नागरिक का अधिकार भी है की अपनी मांगो को अपनी बातो को सरकार तक रख सकें . देशहित में जरुरी है हर धर्म के लोगो के बीच सद्भाव ..देश को तोड़ने वाले या कमजोर करने वाले किसी भी ताकत की पहचान की जिम्मेदारी इस देश के नागरिक की भी है . देश को महान बनाने के लिए हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल पेश करनी ही होगी . देश में अगर भगवा आतंक फैलता है या फ़ैलाने की साजिश रचता है तो उसको भी इतनी कठोरता से निपटा जाए जितना की मुस्लिम आतंकवाद को .
भारत के मुस्लमान से निवेदन है की सिर्फ देश हित से जुड़े हुए मुद्दों पर अपनी एकता का परिचय दें . कोलकाता में और मुंबई में रोहनगिया मुस्लमान पर हो रहे अत्याचार का बदला भारत के सेना के अमर जवान स्मारक को तोड़ कर ना दें . जहाँ भी जायदा मुस्लिम रैली होता है एक तबका भारत विरोधी नारा लगाने लगता है इसका में विरोध करता हूँ . मुस्लिम समुदाय का यह कर्त्वय है की वो भी देश के खिलाफ उठने वाले हर आँख पर नजर रखें और अपने देश की अश्मिता और इज्जत की रक्षा हर प्रकार से करें .
सब से अच्छा हिंदुस्तान हमारा

Monday, November 25, 2019

क्या है देशभक्ति ?

देशभक्ति एक पागलपन है एक जूनून है एक धर्म है कर्म है और सब से बढ़कर एक कर्त्वय है इसके संस्कृति को अक्छुन रखने की इसको पूरी तरह संभल कर रखने की . भारत के लोगों ने एक धर्म विशेष के बहकवाये में आकर और सत्ता की लालच में आकर हमारे देश को दो टुकड़े में बाटा ..यह हमारे पूर्वजो की भारी भूल थी . हम ने अपने देश की इज़्ज़त को ताड़ ताड़ कर दिया इसके जिम्मेदार हम ही है हम ने ही होने दिया ऐसा .
भारत हमेशा से एक सम्प्रवू राष्ट था लेकिन यह हमारी कमजोरी ही थी जो आजादी के लिए देश को टुकड़े टुकड़े होने दिया . इधर फिर से देश की एकता और अखंडता पर कुछ लोग प्रहार करना शुरू कर चुके है जैसे की ओवैशी जी और सपा के सांसद सफिकुर्र रहमान जिन्होंने संसद में सपथ लेते समय वंदे मातरम् बोलने से मना किया यह बोलते हुए की यह इस्लाम के खिलाफ है . देश का अपमान अब बर्दास्त नहीं किया जाएगा देश की एकता और अखंडता कुछ ख़ास शब्दों में छुप्पा रहता है नारो में छुप्पा रहता है ..अगर कोई इन नारो को अपमान करता है तो इसका विरोध करना चाहिए .. भारत के हर भारतीय से उम्मीद है की कृपया इस तरह के नेता ,समाज के लोगो को स्पस्ट रूप से पूर्ण विरोध की आशा है .. जय हिन्द

कौन था जिम्मेदार भारत के टूट का ?

क्यों भारत में विभाजन हुआ था , क्या किसी ने यह जानना चाहा है . हमारे पूर्वजो ने तो आजादी के लिए संगर्ष शुरू किया था एक सम्पूर्ण राष्ट के लिए पुरे हिंदुस्तान के लिए फिर मजहब के नाम पर क्यों देश को तोड़ा गया कोण थे वो गद्दार जिसने देश को टूटने दिया मैं उन सभी को देशद्रोही और गद्दार मानता हूँ जिसने देश को टुकड़े टुकड़े होने दिया . मानता हूँ की उस समय जिन्ना ने डायरेक्ट एक्शन नामक एक मूवमेंट बनाया था और जबरदस्त हिंसा का सहारा लिया था पाकिस्तान नामक नाप्किस्तान बनाने के लिए .
भारत के लोग अगर उस समय थोड़ी दृढ़ता का परिचय देतें तो शायद आज एक मजबूत भारत का सपना सपना नहीं रहता . मुझे शिकायत है ऐसे मजहब से जो तोड़ने की राजनीति करती है जोड़ने की नहीं .. क्या कोई सही शाबित कर सकता है तोड़ने को जलाने को .. पहले मंदिर तोड़ा फिर पुस्ताकलय को तोड़ा फिर देश को तोड़ा ..कब तक टूटते रहेंगे ... हम ... अब फिर से खरे होने का समय हो गया है ... मजबूत देश के पुनर्निर्माण का वक़्त आ गया है .

क्या अयोध्या विवाद भी मुस्लमान के लिए ही उतना ही अहम् है जितना की हिन्दू के लिए ?

मुसलमान अगर काबे की तरफ चटाई बिछा ले तो वहां पर उसकी नमाज आता हो जाती है ... अगर बाबरी मस्जिद पर हिन्दू पक्ष भगवान राम जी की आस्था का सवाल उठता है तो ... यह मस्जिद ...मस्जिदे फितना हो गयी यानी यहाँ विवाद का स्थान है ... यहाँ से हटो .. यहाँ पर अता की गयी नमाज मुकम्मल नहीं होगी .. आस्था और भाईचारी बढ़ाने के लिए दोनों समाज को बैठ कर हल कर लेना चाहिए था ...
अगर आप ज्ञान वापी मस्जिद जो की काशी में है चले जाए और आप हिन्दू बन कर तसवुर कीजियेगा तो आप को लगेगा की आप का यानि हिन्दू का अपमान हो गया है ... काशी हिन्दू की एक प्रमुख धर्मस्थली है .. ज्ञानवापी मस्जिद में आप हिन्दू मंदिरो के दीवारों को स्पस्ट रूप से देख सकतें है . एक समय था जब इन चीजों पर ध्यान नहीं दिया जाता था लेकिन अब मुस्लिम पक्ष को चाहिए की जो मस्जिदे हिन्दू मंदिरो को तोड़ कर मस्जिदे बना दी गयी थी और जो हिन्दू मान्यताओ के जायदा नजदीक है उन सभी जगह स्वेक्षा से मुस्लिम पक्ष मस्जिदों को हटा लें और मंदिर का पुनर्निर्माण करें ... भाईचारे को बढ़ने के लिए पहल तो करना पड़ेगा