ट्रिपल तलाक पर बनाये गए कानून का विरोध मैंने पढ़े लिखे मुसलमान को करते देखा है . मैंने देखा है माननीय मीडिया के कुछ सेक्युलर वक्ताओं को विरोध करते हुए और तो और पढ़े लिखे हैदराबाद के नेताओं ने भी विरोध किया .
हे भारत के पढ़े लिखे जाहिलो आप लोग कब इन्शान बनेंगे आप लोग कब सच को सच बोलना सही का साथ देंगे कब समझेंगे की इस्लाम के अंदर भी कुरुति पैदा हो सकती हैं . समय के साथ अच्छी चीजों का समावेश किया जा सकता है . अगर कोई हिन्दू नेता धर्म से ऊपर उठकर किसी सामजिक कुरीति को नियम कानून के दायरों में लाता है और सामजिक समावेश का उदहारण पेश करता है तो भी भारत के मुसलमान उसके विरोध में खरे हो जातें है मैंने तो मीडिया के एक ऐसे धरे को भी इस फैसले के खिलाफ खरे होते देखा है जिन्होंने सेक्युलर का ढोंग ओढ़ रखा है जिनका नाम आरफा खानम शेरवानी है . आरफा खानम शेरवानी ने तो एक नयी डॉक्टराइन ही इजाद कर दी है जिसमे वो कह रही थी की ट्रिपल तलाक़ के बहाने भारत के हिन्दू , मुस्लिम आदमी की मोरालिटी को यानी आत्मसमंमान पर चोट पंहुचा कर उनको निचा दिखाना चाहता है .
आखिर कब सुधरेंगे हम , जनसँख्या नियंत्रण भी मुसलमान के खिलाफ लोगो को प्रतीत होता है जबकि यह तो देश के लिए एक मुद्दा है . यही हाल मैंने NRC नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजन के लिए भी विरोध के स्वर सुनाई देता है . आखिर सरकार नाम की कोई चीज है की नहीं . क्या अवैध घुसपैठ एक देश हित का मुद्दा नहीं है . क्या भारत सरकार अपने सारे नागरिक का नाम अपने आधिकारिक रजिस्टर में अपडेट नहीं कर सकता है .
मैंने तो कश्मीर में भारत के संविधान में किये गए परिवर्तन का विरोध करते देखा . अगर हिंसा को उतारू भीड़ और भड़काने वाले देश से अपने लोगो को बचने के लिए थोड़ी शख्ती बरती गयी तो उसका भी एक ख़ास वर्ग का विरोध सुना गया . मानवाधिकार और मानवता की बात सुनने को मिली जो सब से जायदा इसका हनन करता आ रहा है .
भारत के हिन्दू और मुसलमानो से अनुरोध है की वास्तविकता से मुँह ना मोरे ... चीजों को यथार्थ में समझे . हिंदुस्तान की धरती सभी धर्मो की जनंनी है और रक्षक है .
हे भारत के पढ़े लिखे जाहिलो आप लोग कब इन्शान बनेंगे आप लोग कब सच को सच बोलना सही का साथ देंगे कब समझेंगे की इस्लाम के अंदर भी कुरुति पैदा हो सकती हैं . समय के साथ अच्छी चीजों का समावेश किया जा सकता है . अगर कोई हिन्दू नेता धर्म से ऊपर उठकर किसी सामजिक कुरीति को नियम कानून के दायरों में लाता है और सामजिक समावेश का उदहारण पेश करता है तो भी भारत के मुसलमान उसके विरोध में खरे हो जातें है मैंने तो मीडिया के एक ऐसे धरे को भी इस फैसले के खिलाफ खरे होते देखा है जिन्होंने सेक्युलर का ढोंग ओढ़ रखा है जिनका नाम आरफा खानम शेरवानी है . आरफा खानम शेरवानी ने तो एक नयी डॉक्टराइन ही इजाद कर दी है जिसमे वो कह रही थी की ट्रिपल तलाक़ के बहाने भारत के हिन्दू , मुस्लिम आदमी की मोरालिटी को यानी आत्मसमंमान पर चोट पंहुचा कर उनको निचा दिखाना चाहता है .
आखिर कब सुधरेंगे हम , जनसँख्या नियंत्रण भी मुसलमान के खिलाफ लोगो को प्रतीत होता है जबकि यह तो देश के लिए एक मुद्दा है . यही हाल मैंने NRC नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजन के लिए भी विरोध के स्वर सुनाई देता है . आखिर सरकार नाम की कोई चीज है की नहीं . क्या अवैध घुसपैठ एक देश हित का मुद्दा नहीं है . क्या भारत सरकार अपने सारे नागरिक का नाम अपने आधिकारिक रजिस्टर में अपडेट नहीं कर सकता है .
मैंने तो कश्मीर में भारत के संविधान में किये गए परिवर्तन का विरोध करते देखा . अगर हिंसा को उतारू भीड़ और भड़काने वाले देश से अपने लोगो को बचने के लिए थोड़ी शख्ती बरती गयी तो उसका भी एक ख़ास वर्ग का विरोध सुना गया . मानवाधिकार और मानवता की बात सुनने को मिली जो सब से जायदा इसका हनन करता आ रहा है .
भारत के हिन्दू और मुसलमानो से अनुरोध है की वास्तविकता से मुँह ना मोरे ... चीजों को यथार्थ में समझे . हिंदुस्तान की धरती सभी धर्मो की जनंनी है और रक्षक है .
